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क्या हैं काल सर्प दोष, कुंडली में कैसे होता है इसका निर्माण ? GuruMaa DhyanMurti Ji

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जन्म कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण तब होता है जब लग्न कुंडली में 12 खानों में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह एक ओर आ जाते हैं जबकि दूसरी ओर सभी भाव खाली होते हैं। कुंडली में राहु और केतु को एक तरह से नॉर्थ पोल और साउथ पोल कहा जाता है। ये एक-दूसरे से हमेशा 180 अंश दूर रहते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच छह भावों का अंतर होता है और इन्हीं छह भावों में एक ओर सभी ग्रह होते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। समाज में इस कालसर्प दोष के बारे में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई है।  इन भ्रान्तियों में माना जाता है कि कालसर्प दोष में जन्म लेने वाला बालक जीवनभर परेशान रहता है। उसका जीवन संघर्षमय हो जाता है। उसके जीवन में महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे नहीं होते हैं। जीवन में निराशा का भाव रहता है और बार-बार हानि और धोखा उठाना पड़ता है। इसी प्रकार कई नकारात्मक धारणा इन लोगों के मन में फैलाई गई है जबकि यह पूरी तरह से सत्य नहीं है। कालसर्प दोष सदैव हानिकारक नहीं होता है। राहु और केतु सदैव वक्री गति से चलते हैं। राहु को काल सर्प का मुख कहा गया है और केतु को काल सर्प की पूंछ। जब राहु की ओर से ...

गुरू मां से जाने झूठ पकड़ने का सबसे आसान तरीका

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झूठ संसार में एक बिमारी तरह है जिससे बचना तो हम सब चाहते है पर हर रोज उसका शिकार हो जाते हैं और शिकार हो होकर हम उसके पीड़ित हो गए है दूसरे का झूठ जानने के लिए सबसे पहले हमें खुद को तराशने की जरूरत है फिर भी आप जानना चाहते है कि सामने वाला  वाला व्यक्ति आपसे झूठ तो नहीं बोल रहा तो कुछ मानदंड के आधार पर आप उसे पकड़ सकते है। झूठ बोलने वाले को पहचानने के लिए आपको करना ये है कि उसकी आंखो पर विशेष ध्यान दें बातचीत के दौरान अगर उसकी आखें दाहिनी तरफ मुड़ रही हैं, वो लगतार नजर नहीं मिला पा रहा है तो तुरन्त समझ जाइये कि वो आपसे झूठ बोल रहा है क्योंकि सच बोलने के लिए सोचना नहीं पड़ता है झूठ बोलने के लिए दिमाग लगाना पड़ता है बोलने से ज्यादा उसे छुपाने के लिए जुगाड़ खोजना पड़ता है यही वजह है कि एक झूठ छिपाने के लिए हजारों नया झूठ गढ़ना पड़ता है। यदि बातचीत करने वाला आपके सामने बैठा है तो उसके पैरों के पोस्चर पर ध्यान रखना है यदि वो पैरों को हिला रहा है तो ये भी झूठ बोलने का ही संकेत है। इसके अलावा पैरों को फोल्ड करके बैठा है तथा कुछ घबराया,डरा हुआ और जल्दी से बातचीत खत्म करने के लिए उत्सुक है त...

अम्बेडकर को याद किया महावीर स्वामी को कैसे भूल गए ? GuruMaa DhyanMurti Ji

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लोगों के कल्याण के लिए,आत्मिक सुख प्राप्ति के तरीके बताने के लिए समय-समय पर तीर्थंकरों ने धरती पर अवतार लिया हैं महावीर स्वामी को जैन धर्म में भगवान माना जाता है. हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती मनाई जाती है। इसी के साथ आज बैसाखी भी है जिसे किसान भाई धरती माँ ने उन्हें अन्नदाता बनाया इस रूप में इसे मानतें हैं।  इसके अलावा जिस गुरु परंपरा ने अखंड भारत में लुटेरों के भेष में घुस चुके अत्याचारी मुगलों से लोहा लेते लेते अनंत दुख सहे, बलिदान दिया परंतु सनातन धर्म नहीं छोड़ा ऐसी गुरुओं की परंपरा को अखंड भारत के निर्माण में सहायक बनाने के लिए अंतिम गुरु श्री गोबिंद सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्‍थापना की थी। क्या है बैसाखी का महत्व?  आपको बता दे बैसाखी का नाम विशाखा नक्षत्र से लिया गया है। इस समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और गुरुद्वारे में अरदास के लिए जाते हैं। बैसाखी के मौके पर सूर्य 12 राशि में प्रथम राशि मेष पर जाते हैं इसी वजह से इसे मेष की संक्रांति भी कहते हैं। इस बार 14 अप्रैल को रात 8 बजक...

जानिए क्या है ध्यान का अनूठा विज्ञान ?

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निश्चित ही ध्यान को लेकर आपके जेहन में हजारों सवाल हैं जो समय समय पर आप सभी किसी ना किसी जरिए से मुझसे पूछते रहते हो इन सावालों में सबसे कॉमन सवाल है कि आखिरकार ध्यान है क्या क्योकि ना तो इसकी कोई तस्वीर है न ही आज तक किसी ने इसे देखा इस कारण ज्यादातर लोग इस ज्ञान से वंचित रहे और जिन्हें इस ज्ञान की अनुभुती हुई तो वो असाधारण हो गए इसके बाद उन्होंने इसे गुप्त रखा या कह लीजिए उन्हें कोई ऐसा नहीं मिला जिसे ये ज्ञान सिखाया जाए।। मुझसे पूछे कि ध्यान क्या है और मैं आपको बता दूं तो भी आप कभी शब्दों के सहारे इसके मायने नहीं समझ पाएंगे क्योंकि शब्दों में इसे परिभाषित करना और समझना उतना ही मुश्किल है जैसे अपने सर के बाल गिनना ध्यान वो गहराई जिसका मापदंड आज तक तैयार नहीं हुआ इसकी शुरुआत तो आप आसानी से कर सकते हैं परंतु इसका अंत आपको नहीं पता खैर फिर भी सरल शब्दों में समझे तो ध्यान व्यवस्थित रूप से जीवन में उस द्वार को खोजने को नाम है जहां से आप में आनंद की किरण उतरनी शुरू होती हैं जहां से आप चीजों से दूर जाते हैं और परमात्मा से जुड़ते हैं। मेरी माने तो ध्यान से ज्यादा कीमती और बहुमूल्य इस संसार म...

कौन हूं मैं... ?

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  मां ध्यान मूर्ति जी महाराज बाल सन्यासी हैं। गुरु माँ का जन्म 4 सितंबर 1992 राधा अष्टमी के दिन संत परिवार में हुआ। शुरुआत से ही उनकी रुचि अध्यात्म की ओर थी , दादा जी का 50 वर्षों तक सन्यासी जीवन में गंगा किनारे रहना तथा अपने माता-पिता को पूर्ण रूप से अध्यात्म जीवन में देखना , घर परिवार में सत्संग का वातावरण होना 5 बरस की उम्र से ही हनुमान जी में एक विशेष रूप से ईष्ट देव होने का भाव पैदा हुआ तब आपके माता पिताजी आपको मेहंदीपुर बालाजी लेकर गए जहां से आपको आपके पिछले जन्मों का स्मरण हुआ । संत सेवा में व्यतीत हुआ है आपके विचार सबको आकर्षित करते थे… जब से होश संभाला उन्होंने श्री कृष्ण के नाम को सिमरण करना शुरू कर दिया यही नहीं श्री कृष्ण के प्रति उनका रुझान थमा नहीं 2001 में श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का वाचन आरंभ किया जिसको सुनने के लिए वृन्दावन में आपके आश्रम के अड़ोस पड़ोस के बहुत से श्रोता इकट्ठा हुआ करते थे । एक दिन सन्यास लेने का प्रस्ताव परिवार के समक्ष रख दिया… उस वक़्त वो आयु में बहुत छोटी थी जिसके बाद उनके इस प्रस्ताव पर परिवार ने कड़ी अप्पति जताई और सन्यास लेने से उन्हें कड़...