क्या हैं काल सर्प दोष, कुंडली में कैसे होता है इसका निर्माण ? GuruMaa DhyanMurti Ji
जन्म कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण तब होता है जब लग्न कुंडली में 12 खानों में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह एक ओर आ जाते हैं जबकि दूसरी ओर सभी भाव खाली होते हैं। कुंडली में राहु और केतु को एक तरह से नॉर्थ पोल और साउथ पोल कहा जाता है। ये एक-दूसरे से हमेशा 180 अंश दूर रहते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच छह भावों का अंतर होता है और इन्हीं छह भावों में एक ओर सभी ग्रह होते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। समाज में इस कालसर्प दोष के बारे में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई है। इन भ्रान्तियों में माना जाता है कि कालसर्प दोष में जन्म लेने वाला बालक जीवनभर परेशान रहता है। उसका जीवन संघर्षमय हो जाता है। उसके जीवन में महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे नहीं होते हैं। जीवन में निराशा का भाव रहता है और बार-बार हानि और धोखा उठाना पड़ता है। इसी प्रकार कई नकारात्मक धारणा इन लोगों के मन में फैलाई गई है जबकि यह पूरी तरह से सत्य नहीं है। कालसर्प दोष सदैव हानिकारक नहीं होता है। राहु और केतु सदैव वक्री गति से चलते हैं। राहु को काल सर्प का मुख कहा गया है और केतु को काल सर्प की पूंछ। जब राहु की ओर से ...