कौन हूं मैं... ?
मां ध्यान मूर्ति जी महाराज बाल सन्यासी हैं। गुरु माँ का जन्म 4 सितंबर 1992 राधा अष्टमी के दिन संत परिवार में हुआ। शुरुआत से ही उनकी रुचि अध्यात्म की ओर थी , दादा जी का 50 वर्षों तक सन्यासी जीवन में गंगा किनारे रहना तथा अपने माता-पिता को पूर्ण रूप से अध्यात्म जीवन में देखना , घर परिवार में सत्संग का वातावरण होना 5 बरस की उम्र से ही हनुमान जी में एक विशेष रूप से ईष्ट देव होने का भाव पैदा हुआ तब आपके माता पिताजी आपको मेहंदीपुर बालाजी लेकर गए जहां से आपको आपके पिछले जन्मों का स्मरण हुआ । संत सेवा में व्यतीत हुआ है आपके विचार सबको आकर्षित करते थे… जब से होश संभाला उन्होंने श्री कृष्ण के नाम को सिमरण करना शुरू कर दिया यही नहीं श्री कृष्ण के प्रति उनका रुझान थमा नहीं 2001 में श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का वाचन आरंभ किया जिसको सुनने के लिए वृन्दावन में आपके आश्रम के अड़ोस पड़ोस के बहुत से श्रोता इकट्ठा हुआ करते थे । एक दिन सन्यास लेने का प्रस्ताव परिवार के समक्ष रख दिया… उस वक़्त वो आयु में बहुत छोटी थी जिसके बाद उनके इस प्रस्ताव पर परिवार ने कड़ी अप्पति जताई और सन्यास लेने से उन्हें कड़...